बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा! योगी सरकार ने उठाए सख्त कदम, जारी किए अहम निर्देश

लखनऊ
उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य जिलों में बारिश का दौर थमने के साथ ही नदियों का जलस्तर में गिरावट से फौरी राहत मिली है हालांकि बाढ़ग्रस्त इलाकों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा गहराने लगा है। लखनऊ,कानपुर,उन्नाव,जालौन,बाराबंकी और प्रयागराज समेत कई जिलों में आज बादलों की आमद पिछले दिनो की अपेक्षा कम रही और धूप खिलने से लोगों को राहत मिली। प्रयागराज,कानपुर,वाराणसी और कन्नौज समेत कई जिलों में गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गयी हालांकि घाघरा और शारदा नदियों में कटान के चलते सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि पानी में समायी रही।

ये भी पढ़ें :  मुख्यमंत्री योगी से मिले सीआईआई के प्रतिनिधि, राज्य में व्यापार और निवेश का बन रहा बेहतर माहौल उद्योग जगत बोला, सीएम योगी के नेतृत्व में बदला प्रदेश का सिस्टम, निवेश के लिए बना भरोसेमंद मॉडल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के कारण देशभर के उद्योगपतियों का रुख उत्तर प्रदेश की ओर बेहतर कानून व्यवस्था से यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद उद्योग स्थापना को लेकर सीएम योगी के साथ उद्योगपतियों ने किया महत्वपूर्ण विचार-विमर्श उद्योगपतियों को इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में हरसंभव मदद करेगी योगी सरकार यूपी में जमीन पर काम करना अब पहले से काफी आसान, प्रोजेक्ट लगाने को लेकर देश की इंडस्ट्री उत्साहित लखनऊ, 03 जनवरी : बेहतर कानून व्यवस्था और स्थिर प्रशासनिक माहौल के चलते उत्तर प्रदेश अब देशभर के उद्योग जगत की पहली पसंद बनता जा रहा है। सुरक्षा, अनुशासन और निष्पक्ष शासन ने निवेशकों का भरोसा प्रदेश में मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप बड़े, मध्यम और छोटे तीनों सेगमेंट के उद्योग तेजी से उत्तर प्रदेश की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री से भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष श्री राजीव मेमानी, नई दिल्ली, श्री उमाशंकर भरतिया, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, इण्डिया ग्लाइको लि०, दिल्ली / नोएडा व श्री सुनील मिश्रा ने मुलाकात कर निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश का सिस्टम और गवर्नेंस मॉडल पूरी तरह बदला है। अब जमीन पर काम करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुआ है और परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के विजन में उद्यमी सहयोग करना चाह रहे हैं। सीएम योगी के साथ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बढ़ाने के लिए भी विचार विमर्श किया गया। उत्तर प्रदेश में डिक्रिमिनलाइजेशन विधेयक लागू होने के बाद इंडस्ट्री का भरोसा और बढ़ा है। इसके साथ ही प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों और प्रोत्साहन के कारण ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब से औद्योगिक इकोसिस्टम को मिली मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर प्रतिनिधिमंड ने स्पष्ट रूप से कहा कि सख्त कानून-व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश का औद्योगिक वातावरण पूरी तरह बदल दिया है। निवेश निर्णयों के लिए आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स हब तथा बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेज विकास ने राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम को नई मजबूती प्रदान की है। सिंगल-विंडो सिस्टम और डिजिटल प्रक्रियाओं से उद्योग स्थापना हुई आसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुए विचार-विमर्श में यह भी सामने आया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अब केवल नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो रहा है। प्रदेश सरकार की सिंगल-विंडो सिस्टम सेवा निवेश मित्र जहां वर्तमान में 43 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं उपलब्ध है, जहा भौतिक हस्तक्षेप के बिना समयबद्ध डिजिटल स्वीकृतियों के चलते प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। राज्य सरकार की प्रो-इंडस्ट्री नीति और त्वरित निर्णय क्षमता निवेश को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में उच्चीकृत निवेश मित्र 3.0 को जल्द लांच किया जायेगा जिसमें एआई व चैटबाट जैसी सुविधाओं से निवेशकों की निवेश यात्रा और आसान होगी । यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर उद्यमी उत्साहित प्रतिनिधियों ने कहा कि समग्र रूप से बेहतर कानून व्यवस्था, सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी प्रशासन और उद्योगों को मिल रहे सहयोग के चलते उत्तर प्रदेश एक विश्वसनीय और स्थिर निवेश राज्य के रूप में उभर रहा है। यही कारण है कि देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपति आने वाले समय में यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि तय मानी जा रही है।

प्रयागराज से प्राप्त रिपोटर् के अनुसार गंगा और यमुना नदिया अब खतरे के निशान के नीचे पहुंच गई है। बीते 24 घंटे में गंगा नदी का फाफामऊ में जलस्तर 155 सेंटीमीटर और छतनाग में 146 सेंटीमीटर कम हुआ है जबकि नैनी में यमुना नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे में 123 सेंटीमीटर कम हुआ है। यमुना नदी का जलस्तर 5.12 सेंटीमीटर प्रति घंटा और गंगा नदी का जलस्तर 6.45 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कम हो रहा है हालांकि अभी भी दर्जनों मोहल्ले और गांव बाढ़ की चपेट में है। इन इलाकों में अभी भी नावें चल रही हैं अभी भी बड़ी संख्या में लोग बाढ़ राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं लेकिन जिस रफ्तार से जलस्तर कम हो रहा है।

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वाराणसी में केंद्रीय जल आयोग की रिपोटर् के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घटने लगा है। गंगा का जलस्तर आज 71.58 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही अब संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। मेयर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ कम होने पर संक्रामक रोगों को रोकने के उपायों पर चर्चा की है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कम हो रहा है, वहां नगर निगम की टीमें सफाई, एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग कर रही हैं। वरुणा नदी के किनारे नक्खी घाट, पुलकोहना, शक्कर तालाब और शहरी क्षेत्रों में सामने घाट, अस्सी, नगवा जैसे इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। 

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